Separation/बिछड़न

Separation/बिछड़न

निकल कर आ जो जाते हो सुबह भटकते तारों से हुए बेबस हालातों से, हुए बेबस जस्बातों से न चाहें तो या चाहें तो रुकें कैसे न जानें हम सुबह है आफ़ताबों से और एक तेरे ख्यालों से मचलती धूप सी गर्मी, तड़पती जो ज़मानों से बिखरती आसमानों से, बस एक तेरे इशारों से तबस्सुम के शरारों से...