निकल कर आ जो जाते हो सुबह भटकते तारों से
हुए बेबस हालातों से, हुए बेबस जस्बातों से

न चाहें तो या चाहें तो रुकें कैसे न जानें हम
सुबह है आफ़ताबों से और एक तेरे ख्यालों से

मचलती धूप सी गर्मी, तड़पती जो ज़मानों से
बिखरती आसमानों से, बस एक तेरे इशारों से

तबस्सुम के शरारों से जलाते गुलिस्तां को तुम
हो पूछते क्या मिलता मुझको है बागानों से

तो जाओ देख लो वो पहली लौ गंगा किनारे पे
है मिलता वैसा ही सुकून समय की इन दरारों से

कभी चले थे एक ओर ही जिन रास्तों पर हम
मैं जाता हूँ आज भी उधर यादों के वीरानों से

नज़रों की शरारत और नज़ाकत जानलेवा है
मैं आँखें बंद कर निकलता हूँ अब अपने ठिकानों से

कभी आवाज़ देकर तुम बुला लो, मुकद्दर कहाँ
नाम भी अपना भुला चुके हैं हम ज़मानों से

चलो अब एक तुम्हारा रास्ता और एक हमारा है
मिलेंगे फिर कभी एक छोर निकल कर इन बाज़ारों से

नज़र से आतिशें बिखेरना एक दफा फिर तुम
हो लेंगे घायल हम फिर एक दफा दिल के तरानों से

 

Context: बिछड़न, as the literal meaning of the word, is about separation. What a person thinks about when he knows separation is inevitable and what he wishes for.

Meanings:

आफ़ताब – Sun

तबस्सुम – Smile

शरारा – Spark

गुलिस्तां – Flower Garden

नज़ाकत – Elegance

मुकद्दर – Fate

आतिश – Fire

तराना – Song